स्वास्थ्य सेवा में नालंदा ने नौवें स्थान से छलांग लगाते हुए तीसरा स्थान प्राप्त किया है। राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा 34 पैरामीटरों के आधार पर जारी की गयी रैकिंग में नालंदा तीसरे स्थान पर है। इसी साल जनवरी माह की रैकिंग में जिला नौवें स्थान पर था। इस बीच स्वास्थ्य सेवा में सुधार से रैकिंग में भी सुधार दिख रहा है। सिविल सर्जन डा. राम सिंह ने बताया कि 34 स्वास्थ्य सूचकांकों के आधार पर राज्यस्तरीय रैकिंग जारी की गयी है। जिसमें जिले की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। इससे स्वास्थ्यकर्मियों का भी उत्साह बढ़ा है। साथ ही इस रैकिंग को बरकरार रखते हुए पहले स्थान का सफर तय करने की चुनौती भी बढ़ी है। उत्साह बढ़ने से स्वास्थ्यकर्मी और बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
800 अंकों की यह है 34 सूचकांक
रैकिंग के लिए जिन 34 पैरामीटर को आधार बनाया जाता है उसके लिए कुल 800 अंक निर्धारित किये गये हैं। गर्भवती महिलाओं का निबंधन, प्रसव पूर्व पहली तिमाही में महिलाओं का निबंधन, संस्थागत प्रसव, आधुनिक परिवार कल्याण के उपयों की दर, सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट में भर्ती बच्चों की संख्या और भर्ती रहे दिनों की संख्या, पूर्ण टीकाकरण, खून की कमी दूर करने के लिए आयरन टेबलेट की आपूर्ति, एम्बुलेंस का प्रतिदिन परिवहन दर, पीएचसी स्तर पर प्रति लाख जनसंख्या में हर माह ओपीडी की सेवा आने वाले मरीजों की संख्या, लेबोरेटरी में स्वास्थ्य जांच की संख्या, अल्ट्रा साउंड की उपयोगिता दर, खोजे गये नये टीबी मरीजों संख्या, टीबी और कालाजार मरीजों के लिए दवा की उपलब्धता की स्थिति, ओपीडी दवाओं की उपलब्धता, राशि का खर्च, आशा का प्रशिक्षण, आशा का भुगतान, कन्या उत्थान योजना का भुगतान और चिकित्सकों का ओपीडी में प्रदर्शन के आधार पर रैकिंग जारी की गयी है।
नालंदा को 56.1 प्रतिशत अंक, पटना 24वें स्थान पर: 56.1 प्रतिशत के साथ नालंदा तीसरे स्थान पर है। जबकि राजधानी पटना 40.6 प्रतिशत अंक के साथ 24वें स्थान पर है। कैमूर 64.6 प्रतिशत के साथ पहले, वैशाली 60.4 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। टॉप 10 जिला में कैमूर, वैशाली और नालंदा के अलावा जहानाबाद, सारण, भोजपुर, शेखपुरा, औरंगाबाद, मधेपुरा और अरवल शामिल है।
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