(मधुरेश)जिसकी उम्मीद थी, वही हुआ। मान लिया गया कि इस साल होने वाला बिहार विधानसभा चुनाव, कोरोना और इसके आयामों, इससे जुड़े मुद्दों पर लड़ा जाएगा। इस मसले पर राजनीति न करने की सलाह देकर भी मजे की राजनीति की जा रही है। फिलहाल बीमार तलाशे जा रहे हैं। अभी बचाव और राहत-पुनर्वास का बड़ा लंबा दौर, बड़ा टॉस्क बाकी है। जो सीन है, इन सबके पोर-पोर, यानी हर स्तर पर राजनीति होगी।
वैश्विक संकट कोरोना को जीतने के लिए वैश्विक एकजुटता की दरकार को कबूल कर बाकायदा अंजाम दिया जा रहा है मगर बिहार में नेताओं की टोली, अपने को, शुरुआत तक में भी, शांत नहीं रख सकी। सब भिड़ गए। इस बहस में पड़े बिना कि दूसरे राज्यों में फंसे बिहारियों को ठीक से रखना वहां के राज्य सरकारों की जिम्मेदारी नहीं थी; कि आखिर केंद्र ने इसका खास ख्याल क्यों नहीं रखा; कि जब दिल्ली से बिहारियों को भरमाकर निकाला गया फिर भी ‘दिल्ली’ चुप रही; कि सिर्फ बिहार सरकार ही जिम्मेदार है; कि ये ज्यादा जिम्मेदार हैं और वह थोड़े कम; कि विपक्ष को जनहित में सबकुछ चुपचाप देखते रहना चाहिए; कि जनहित क्या है... रोज नए मुद्दे आ जा रहे। बाहर फंसे लोगों की घर वापसी का यह एजेंडा तब चरम पर पहुंचा, जब हिसुआ के भाजपा विधायक अपनी बेटी को कोटा से घर ले आए।
सत्ता पक्ष का तर्क : लॉकडाउन का मतलब कोरोना पर काबू पाना है न कि फैलाना
- सोशल डिस्टेंसिंग, कोरोना से बचने का उपाय है। लॉकडाउन, इसके लिए ही है। ये बातें कैसे मान ली जाएं कि कोटा में और देश में जहां-तहां जो लोग फंसे हैं, उनको अभी ही बुला लिया जाए। ऐसे में तो कोरोना से लड़ाई में हमलोगों द्वारा अब तक की गई पूरी मेहनत बेकार हो जाएगी। ऐसी बातों को मानना, ऐसा करना, लॉकडाउन का मजाक उड़ाना होगा। बाहर जो बिहार के लोग हैं, हम उनकी हरसंभव मदद कर रहे हैं।-नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री
- तेजस्वी, बिहार को कोरोना का हॉट स्पॉट बनाना चाहते हैं? राजनीतिक फायदे के लिए जानलेवा संकट की इस घड़ी में लोगों को भड़का रहे हैं।-संजय झा, जल संसाधन मंत्री
- उत्तरप्रदेश सरकार ने तो केंद्र सरकार के आदेश तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक के आग्रह का उल्लंघन कर दिया। हम भी ऐसा कर दें। बिल्कुल नहीं। - नीरज कुमार, सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री
विपक्ष का सुर-सबके लिए एक तरह का हो कानून
- अगर गुजरात, यूपी सरकार और भाजपा के सांसद-विधायक अपने यहां के लोगों/बच्चों को दूसरे राज्यों से ले जा सकते हैं, तो बिहार सरकार क्यों नहीं? बिहार के ही एक विधायक कोटा से अपने बच्चों को ले आए? सक्षम लोगों के लिए एक कानून और गरीबों के लिए दूसरा? -तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष
- डॉ.मदन मोहन झा बोले-नियम एक हो। खास के लिए खास सुविधाएं नहीं हो। बिहार के लोगों को लाया जाए।
- शरद यादव ने कहा- लोग तो विदेशों से हवाई जहाज तक में लाए गए। फिर बिहारी लाठियां खाने को क्यों विवश हैं।
- कुणाल बोले- यह तो दोरंगी नीति है। सत्ताधारी नेता बाहर से परिजन को ले आता है और गरीब त्राहि-त्राहि कर रहा है।
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