सदर अस्पताल के सभागार में मंगलवार को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले के 85 एएनएम को प्रशिक्षित किया गया। इस अवसर पर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ राजीव कुमार ने कहा कि चिकित्सक एवं नर्स हमेशा कार्य किसी तरह खत्म कर घर जाने की जल्दबाजी में रहते हैं, यह अच्छी बात नहीं है। जब भी कोई शिशु जन्म हो तो उसके पास समय दें और उसके पूरे शरीर को गंभीरता से देखें। जांच के दौरान किसी प्रकार की विकृति दिखे तो तुरंत उसको नोट करें और पूरी जानकारी चिकित्सक एवं अस्पताल प्रबंधक को दें। क्योंकि हो सकता है कि नवजात शिशु का ओठ कटा हो, मस्तिष्क का साईज बड़ा हो, पैर के बनावट में त्रुटि हो, पेट बड़ा हो सकता है।
साथ ही जन्मजात मोतियाबिंद या ह्रदयरोग भी हो सकता है। ऐसे में शिशु के पूरे शरीर को जांचे बगैर चले जाने से कई विकृतियों का पता ही नहीं चलेगा। नवजात के सांस के चलने के रफ्तार को जांचने का निर्देश देते हुए प्रशिक्षक ने कहा कि ऐसा करने से जन्मजात बीमारियों की जानकारी मिलेगी और ससमय इलाज शुरू हो जाएगा, जिससे कि बच्चे को बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुरानी मान्यताओं के अनुसार नवजात को रोते देख मान लेना कि वह स्वस्थ है, यह ठीक नहीं है। इस धारणा में सुधार लाने की जरूरत है।
विकृत बच्चों के निशुल्क इलाज की है व्यवस्था
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चार बच्चो को बेहतर इलाज हो चुका है। साथ ही पांच बच्चों का आई जीएमएस एवं एम्स, पटना में इलाज चल रहा है। यह जानकारी कार्यक्रम समन्वयक डॉ रतीश रमण ने दी है। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान सभी एएनएम को इस योजना से लाभान्वित परिवार एवं बच्चों की जानकारी दे रहे थे। उन्होंने बताया कि वीरपुर प्रखंड के भवानंदपुर निवासी राजकुमार साहू के पुत्र मोनू कुमार के दिल में 9 एमएम के छेद को आई जीएमएस व डीह गांव के मंजेश सिंह के पुत्र ओमप्रकाश को एम्स में निशुल्क ऑपरेशन किए जाने की बात कही। उन्होंने बताया कि तेघड़ा प्रखंड के आलापुर गांव निवासी मन्नू पंडित के पुत्र अभिजीत कुमार के पीठ में जन्मजात घाव एवं बारो गांव के मोनिका कुमारी की पीठ वैलून की तरह फूला होने की जानकारी मिलने पर एम्स पटना में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत निशुल्क इलाज कराई गई। उन्होंने अब तक एक दर्जन बच्चों के निशुल्क इलाज कराए जाने की जानकारी दी। प्रशिक्षण में शामिल सभी एएनएम को नवजात में किसी भी प्रकार की विकृति दिखने पर सूचित करने को कहा। डॉ रमन ने बताया कि इस विषय पर जिला के सभी एएनएम को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बेगूसराय विकृत नवजात बच्चों की पहचान करने के तरीकों की जानकारी देते चिकित्सक।
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