देशभर में 21 दिन से जारी लॉकडाउन को 19 दिन और बढ़ा दिया गया है, यानी 3 मई तक। इस साल अगर 23 अप्रैल की रात चांद दिखता है तो रमजान 24 अप्रैल से शुरू हो जाएगा। यानी रमजान के शुरुआती 10 दिन लॉकडाउन में गुजरना तय है। मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिदों में नहीं जा सकेंगे। उन्हें अपने घरों में ही इबादत और इफ्तार करना होगा। रमजान में पढ़ी जाने वाली विशेष नमाज तरावीह भी मस्जिदों में नहीं होगी।
घरों पर ही पढ़े नमाज
बड़ा तेलपा जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना रज्जबुल कादरी ने बताया कि रमजान में लॉकडाउन का पालन करें और इस महामारी से बचाने के लिए अल्लाह से खास दुआ करें। रमजान में लोग तरावीह की नमाज पढ़ें लेकिन मस्जिद में एक वक्त में पांच से ज्यादा लोग जमा ना हो। मोहल्ले के बाकी लोग मस्जिदों में आने की बजाय घरों में ही रहकर तरावीह और दूसरी नमाजें अदा करें। उलेमाओं के मुताबिक गर्मियों में दिन बड़े होते हैं। ऐसे में रोजे का समय भी इस दौरान सबसे अधिक रहता है। इस साल रमजान माह का सबसे अधिक समय का रोजा 14 घंटे का होगा। अलग-अलग जगहों के हिसाब से समय में कुछ बदलाव हो सकता है। अभी शाबान का महीना चल रहा है। इसके खत्म होने के बाद रमजान माह शुरू होगा। चांद नजर आने के साथ ही तरावीह की नमाज शुरू हो जाएगी। अगले दिन रोजा रखा जाएगा।
गुनाहों से बचने की सीख
उलेमा के मुताबिक यह महीना हमें गुनाहों से बचने और भलाई के रास्ते पर चलने की सीख देता है। पूरे माह के रोजे फर्ज हैं। रोजे के मायने केवल भूखे प्यासे रहना नहीं है। बल्कि खुद को हर उस बात से रोकना है, जिससे किसी को तकलीफ पहुंचे। उलेमा बताते हैं जुबान से किसी की बुराई या ऐसी बात न बोले जो किसी को बुरी लगे। हाथों से ऐसे काम न करे जो किसी को तकलीफ पहुंचाए। उन जगहों पर न जाए जहां गुनाह हो रहे हैं।
रमजान प्रशिक्षणका महीना
रमजान माह प्रशिक्षण का माह है। यह इंसान को निखारता है। यह माह इस बात का प्रशिक्षण देता है कि इंसान अपने हाथों से किसी का बुरा न करे। पैर कभी किसी का बुरा करने के लिए आगे नहीं बढ़े। कान से बुरा नहीं सुनें। आंखें बुरा नहीं देखे। किसी पर किसी भी प्रकार से जुर्म न करे। प्रशिक्षण में जो सीखा है उसे जीवन में उतारे। यह माह संयम और अध्यात्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की, लोगों के दुख दर्द को समझाने की, नेकी व ईमान की राह पर चलने की सीख देता है।
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