लाॅकडाउन में सोमवार से शर्तों के आधार पर दी गई कुछ छूटों के चलते अगले दिन सुबह से दोपहर तक सड़कों पर अधिक चहल पहल दिखाई दी। वहीं कुछ कार्यालयों व निजी अस्पतालों में भी लोग गए, लेकिन मौका मिलते ही 27 दिनों में सीखे सभी नियम भूल गए। बैंकों के बाहर तो बहुत ही बुरा हाल रहा। लोगों को शायद यह याद नहीं कि यह छूट स्थायी नहीं है। नियमों को तोड़ने पर कभी भी वापस ली जा सकती है। इस लिए बेहतर होगा कि संयम बरतें और नियमों का पालन करें। इस बारे में गाइडलाइन भी जारी की है।
पिछले सप्ताह बैंकों में लेनदेन में बरती गई थी सख्ती अब ढील मिलने से कंट्रोल खत्म
सरकार द्वारा गरीबों के खातों में 500 रुपए डालने के बाद उन्हें निकालने के लिए भीड़ लग रही है। लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ गई। बीते सप्ताह बैंकों में लोगों के जमा होने के बाद प्रशासन ने लेनदेन में सख्ती बरती गई थी। थोड़ी ढील मिलने पर सारा कंट्रोल खत्म हो गया।
दो महीने तक खाते में आएंगे रुपए
गांवों में ये अफवाह चल पड़ी है कि अगर अभी पैसे नहीं निकाले तो ये खाते से वापस चले जाएंगे। ऐसे में गांवों से लोग निकालने आ रहे हैं। कुछ बैलेंस चैक करने भी पहुंच रहे हैं। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि वो लोगों को भरोसा दिलाए कि पैसा वापस नहीं जाएगा। आने वाले दो महीनों तक 500-500 रुपए और खातों में जमा होना है।
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