(राजेश कुमार) जिले के किसानों के सामने विकट स्थिति आ गई है। किसान फसलों को बेचने के लिए सरकारी तंत्र में उलझ कर रह गए हैं। किसानों को कभी बारिश तो कभी सूखा तो कभी प्राकृतिक आपदा से बचने के बाद तैयार फसल का उचित मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। जिले कह 300 समितियों में से पिछले सीजन में 209 समितियों ने धान की खरीदारी सरकारी आदेश से की है। अनाज आज भी पैक्सों में सड़ रहे हैं।
जिला सहकारी समिति के अध्यक्ष रामायण चौधरी ने बताया कि एसएफसी द्वारा गोदाम में जगह नहीं है का बहाना बनाकर मिलरों से चावल का उठाव नहीं किया जा रहा है। इससे समितियों का कर्ज का सूद बढ़ता जा रहा है। कई समितियों ने किसानों के धान अधिप्राप्ति के पैसे उनके खाते में भेज दिया है। पैक्सों के सामने अब अगली फसल गेंहू की खरीदारी की भी समस्या खड़ी हो गई है।
चावल लेने के बाद होता है भुगतान
जिले के किसानों से साख समितिया अनाज की खरीदारी करती है। इस खरीदे गए धान की फसल को सरकार के द्वारा अधिकृत मिल में चावल तैयार करने के लिए दिया जाता है। उसके बाद एसएफसी इन चावलों को लेती है। उसके बाद समितियों को भुगतान किया जाता हैं। अब धान की खरीदारी कर समितिया रखह ली है और एसएफसी उसका उठाव ही नही लर रही है। जिससे समितियों के सामने संकट छा गया है।
29 हजार एमटी हुई है धान की खरीद, चावल एसएफसी को लेना है
जिले के 209 समितियों ने कुल मिलाकर 29 हजार एमटी धान की खरीदारी की है। जो सरकार के द्वारा निर्धारित लक्ष्य 40 हजार एमटी से 11 हजार एमटी कम है। अब खरीदारी के बाद तैयार चावल को एसएफसी को लेना है। जो नहीं हो रहा है।
53.39 करोड़ लिया गया है कर्ज
209 समितियों ने 53.39 करोड़ कर्ज लेकर धान की खरीदारी की है। चावल के पैसे मिल जाने के बाद इन समितियों को सूद के साथ इन सभी पैसे को को ऑपरेटिव बैक को लौटना है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2WdLQP8
No comments:
Post a Comment