सीएचसी मुशहरी में एईएस से बचाव की तैयारी व जलालपुर में 4 वर्षीय इरशाद की मौत मामले की जांच के लिए गुरुवार को दो टीम पहुंची। टीम में शामिल डाॅ. चंद्रशेखर प्रसाद व डाॅ. आलोक रंजन ने जलालपुर में जाकर डायरिया के साथ तेज बुखार से हुई मौत की जानकारी इरशाद के पिता रहमूद से ली। डॉक्टर ने बताया कि सीएचसी के रजिस्टर में इरशाद काे तेज बुखार व दस्त हाेने की शिकायत दर्ज है। वरीय अधिकारियों को रिपोर्ट साैंपी जाएगी। सीएचसी में एसीएमओ व जिला मलेरिया अधिकारी ने जांच की तो पाया कि जो एएनएम एईएस वार्ड में प्रतिनियुक्त थीं, उन्हें बीमार बच्चों की प्रारंभिक जांच किट से ब्लड शुगर या ग्लूकोज जांच करने नहीं आता है। जांच टीम ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि अप्रशिक्षित एएनएम से एईएस वार्ड में कार्य लिया जाना खेदजनक है, जबकि तीन माह पहले जिले की सभी एएनएम काे पैथोलॉजिकल जांच की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। एईएस वार्ड की प्रभारी एएनएम रूपम ने जांच अधिकारी के समक्ष वार्ड में कार्यरत एएनएम कांति कुमारी व इंदु कुमारी को म्युकस सकर टेस्ट और ब्लड शुगर टेस्ट करना सिखाया। एसीएमओ डाॅ. विनय शर्मा व जिला मलेरिया अधिकारी डाॅ. सतीश कुमार ने बताया कि एईएस वार्ड हो या स्वास्थ्य उपकेंद्र पर कार्यरत एएनएम, सबको पैथोलॉजिकल जांच की जानकारी आवश्यक है। मौके पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ. उपेंद्र चौधरी, डाॅ. ज्ञानेंद्र व स्वास्थ्य प्रबंधक कुमार राम कृष्ण भी थे।
जांच के लिए सीएचसी में गए थे। अधिकारी काे देख कर माैजूद एएनएम कुछ समय के लिए घबरा गई। हालांकि एईएस वार्ड में तैनात सभी एएनएम ट्रेंड हैं। हमने खुद सभी से जांच करवा कर देखा है। -डाॅ. सतीश कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी
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