एम्स पटना के चर्म रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. श्वेतलीना प्रधान और उसी विभाग के एसआर (सीनियर रेसिडेंट) डाॅ. माे. माेअज्जम अारिफ के बीच ड्यूटी काे लेकर अापस में ठन गई है। यही नहीं दाेनाें ने एक-दूसरे पर गंभीर अाराेप लगाए हैं। इधर मामला तूल पकड़ता देख एम्स का रेसिडेंट डाॅक्टर्स एसाेसिएशन एसआर के पक्ष में उतर गया है। यह मामला एम्स के निदेशक डाॅ. पीके सिंह तक पहुंच गया है। दाेनाें ने एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर अाराेप लगाते हुए निदेशक से लिखित शिकायत की है। निदेशक ने इस बाबत बताया कि दाेनाें की लिखित शिकायत मिली है। शुक्रवार काे जांच के लिए टीम गठित कर दी जाएगी। जांच के बाद जाे बातें सामने आएंगी उसके बाद देखा जाएगा कि क्या उचित कार्रवाई करनी है।
एसआर का आराेप- बिहारी कहकर बुरा-भला कहा
एसआर डाॅ. आरिफ का आराेप है कि डाॅ. श्वेतलीना ने 28 अप्रैल काे मुझे बिहारी कहकर बुरा-भला कहा। उनका आराेप है कि गाली-गलाैज की। उन्हाेंने यहां काम करने का माहाैल खराब कर दिया है। वे अस्पताल के नियमाें का ठीक से पालन नहीं करती हैं। डाॅ. आरिफ का आराेप है कि इससे पहले भी इसी विभाग के तीन एसआर इस्तीफा देकर चले गए हैं। बावजूद वे अपनी हरकत से बाज नहीं आरही हैं।
विभागाध्यक्ष बोलीं- काम करना नहीं चाहते एसआर
डाॅ. श्वेतलीना प्रधान का कहना है कि एसआर ने जाे आराेप लगाए हैं वह निराधार हैं। एसआर काम करना नहीं चाहते हैं। एक मरीज के साथ डाॅ. आरिफ ने मिसविहैब किया था। इतना ना ही नहीं एक मरीज को दवा रिएक्शन कर गया था इसकी सूचना हमें नहीं दी। एसआर ने हमारे चैंबर में आकर उंगली दिखाकर दुर्व्यवहार किया इसकी शिकायत डायरेक्टर से पहले ही कर दी थी।
आरडीए की दलील, एसआर की शिकायत सही पाई गई
इधर, आरडीए के सचिव डाॅ. राशिद अनवर ने बताया कि एसआर की शिकायत की जांच की गई है जाे सही पाया गया है। डायरेक्टर इस मामले की जांच करें। यह बेहद जरूरी है।
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