लॉकडाउन से बच्चों की पढ़ाई का हो रहा नुकसान, किसी के पास लैपटॉप नहीं तो किसी के पास डेटा - Dainik Darpan

Hot

Post Top Ad

Thursday, April 23, 2020

लॉकडाउन से बच्चों की पढ़ाई का हो रहा नुकसान, किसी के पास लैपटॉप नहीं तो किसी के पास डेटा

कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित हो रही है। विद्यालयों द्वारा प्रयास जारी है कि बच्चों की पढ़ाई की क्षति कम से कम हो, किन्तु तमाम उपायों-प्रयासों के बावजूद यह तय है कि पढ़ाई के मोर्चे पर बच्चों को काफी क्षति होती दिख रही है। दैनिक भास्कर ने यह पड़ताल करने की कोशिश की।
ऑन लाइन ही पढ़ाई का एकमात्र माध्यम बचा है। इसी से पढ़ाई कराने की कोशिश की जा रही है। कई तरीके इसके लिए इस्तेमाल किये जा रहे हैं। इसके बावजूद कक्षाओं में बैठकर पढ़ने में जो आनंद और सरलता बच्चों को महसूस होती है, वैसा ऑन लाइन में नहीं है। इस कारण क्षति तय है। अब इसकी भरपाई कैसे होगी, यह बड़ा मुद्दा है। जितना दिन लॉक डाउन की अवधि बढ़ेगी, उतनी ही मुश्किल होगा क्षतिपूर्ति का कार्य करना। विद्यालय प्रबंधकों-संचालकों के अनुसार छुट्टियों में कटौती ही एक मात्र रास्ता है, जिससे पढ़ाई की हुई क्षति को कम किया जा सकता है। इसके अलावा क्लास के घंटे में वृद्धि, हर महीने रविवार की चार-पांच छुट्टियों में कुछ कटौती कर के, कोर्स का दायरा कम करके ही पढ़ाई की क्षतिपूर्ति की जा सकती है। किन्तु यह भी तय है कि जितना लंबा लॉक डाउन बढेगा, उतना ही अधिक पढ़ाई की क्षतिपूर्ति होगी।
इस तरह पढ़ाया जा रहा बच्चों को

सन बीम स्कूल के निदेशक राजीव रंजन, मॉडल पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल और ग्लोबल मॉडर्न स्कूल के निदेशक डॉ.अंशुमान से इस मुद्दे पर बातचीत की। राजीव रंजन ने बताया कि सभी से ह्वाट्सएप और ईमेल आईडी लिया गया है। सबको पीडीएफ और वीडियो क्लिप बनाकर स्टडी मेटेरियल उपलब्ध कराया जा रहा है। हेल्प लाईन नम्बर उपलब्ध कराया गया है, ताकि कोई भी डाउट सॉल्व कर सकें बच्चे। इसमें इस बात का ध्यान रखा गया है कि बच्चे पढ़ने में सरलता महसूस कर सके।

समस्या यह है कि

ऑनलाइन पढ़ाई में समस्या भी आ रही है। बहुत से बच्चों के पास डेस्कटॉप या लैपटॉप नहीं है। मोबाइल भी बड़े आकार का नहीं है। नेटवर्क की समस्या अलग है। बच्चों को पहली बार इस तरह के नए अनुभव से गुजरना पड़ रहा है और अभिभावकों को भी। इससे नयी तरह की समस्या खड़ी हुई है। घर के कमरे में बंद होकर मोबाइल पर पढ़ने और क्लास में बैठ कर सीधे पढ़ने में काफी अंतर है। मानसिकता के स्तर पर भी और व्यावहारिकता के स्टार पर भी। बच्चे सहजता का अनुभव न कर बोझिल हो जाते हैं। कई ग्रहों में समस्या यह है कि मोबाइल की संख्या से अधिक ऐसे बच्चों की संख्या है जिनको ऑन लाइन क्लास करनी है। ऐसे में वक्त और श्रम अधिक लग रहा है।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Lockdown causing loss to children's education, no one has laptop, no one has data


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2x8bPim

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad