मछली पकड़ने और बेचने का कारोबार करना लॉकडाउन के दायरे से बाहर रखा गया है। हालांकि इन्हें भी सुरक्षित तरीके से ही कारोबार करना है। इसलिए इसके नियम भी बनाए गए हैं। कोरोना संक्रमित होने से बचने के लिए शहर और ग्रामीण इलाके के मछुआरों के संगठन ने मत्स्य बाजार समिति को फिलहाल बंद रखने का निर्णय लिया है। लेकिन शासन ने मछली कारोबार और मछुआरों की आर्थिक हालात को देखते हुए सोन नदी से मछली पकड़ने और इसका व्यापार करने के लिए शेरशाह सूरी की बनवाई गयी सोन नदी में 480 बरस पुरानी पत्थर की सड़क पर इजाजत दे दी है। इस सड़क का निर्माण शेरशाह सूरी ने देश में अपने शासनकाल 1540-45 के बीच किया था।
मछुआरों के बीच पहुंचे एएसपी संजय: सरकार ने खाने पीने की चीजों को लॉक डाउन के प्रतिबंध से बाहर रखा है और इसी दायरे में मछली की बिक्री भी शामिल है। लॉक डाउन के दूसरे फेज के बाद सोन नदी के किनारे बसे मछुआरों के समक्ष खाने-पीने सहित कई तरह के संकट खड़े हो गए थे। इनके खराब हो रहे आर्थिक हालात को देखते हुए मछली का कारोबार सोशल डिस्टेंसिंग सहित सुरक्षित तरीके से करने की इजाजत देने के लिए एएसपी संजय कुमार मछुआरों के बीच पहुंचे और इस संबंध में उनके प्रतिनिधियों से बात की और फिर इसकी इजाजत दे दी है। दैनिक भास्कर ने बुधवार को मछुआरों के हालात से रूबरू कराते खबर प्रकाशित कर सभी को जानकारी दी थी। जिस पर प्रशासन ने पहल की है।
कैसा होगा अस्थाई मछली बाजार
नगर भवन के पीछे सोन नदी में बनी चौड़े पत्थर की सड़क और स्लीपवे में मछली बाजार लगेगा। यह सड़क 17 फीट चौड़ी पत्थर के पटिया से बनी है। पत्थर के एक स्लीपर की लंबाई 3 से 9 फीट तक है और इसकी मोटाई 9 इंच से 1 फीट है। चौड़ाई भी डेढ़ फुट की है। स्लीपर के नीचे बोल्डर पीचिंग है। नदी के पानी की निकासी के लिए छोटी-छोटी पत्थर की पुलिया बनी है। करीब 3.80 किलोमीटर कि इस सड़क में फ्लडवे के किनारे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए गोल घेरा बना कर मछली विक्रेता अपनी दुकान लगाएंगे। पत्थर की सड़क पर खरीदार होंगे। फिलहाल इस सड़क की बात करें तो इसके निर्माण में करीब 51156 एमक्यू पत्थर लगा है जिसकी कीमत करीब 200 लाख रुपए है।
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