ग्रामीण महिलाओं की होली को सार्थक बनाने को लेकर सोमवार को लोक हित में काम करने वाली संस्था त्रिवेणी ने शहर के दूर सूजा भर्रा गांव में महिलाओं को घरेलू संसाधन से गुलाल बनाना सिखाया। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और होली जैसे पर्व पर अपना खर्च निकालने को लेकर संस्थान ने यह पहल की है। दरअसल त्रिवेणी संस्था ग्रामीण जीविका उपार्जन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह संस्था ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भिन्न-भिन्न तरह के रोजगार का सृजन करती है। इसी क्रम में संस्था द्वारा सूजा, भर्रा हनुमान मंदिर के निकट एक स्कूल के प्रांगण में ग्रामीण महिलाओं को अबीर कुटीर उद्योग का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया गया। जहां महिलाओं को अरारोट और रंग से नेचुरल गुलाल बनाना सिखाया गया। प्रशिक्षण में काफी कम खर्चे और कम मेहनत में महिलाओं ने गुलाल बनाया जो बेहद ही आकर्षक था। साथ ही इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं पड़ता है।
संस्था के संस्थापक ने कहा-महिलाओं के स्वरोजगार से जुड़ने से समाज का होगा विकास
इस संबध में त्रिवेणी संस्था के संस्थापक अंजली प्रिया ने बताया कि ग्रामीण महिलाएं जब स्वरोजगार से जुड़ेंगी, तो उनका और हमारे समाज का विकास निश्चित रूप से होगा। उन्होंने बताया कि संस्था की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संस्था बिना कोई शुल्क लिए ग्रामीण महिलाओं को छोटे-छोटे उद्योग को करना सिखाती है। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष रामदेव राय, सचिव वेद प्रकाश झा, राजेश हिसारिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मौके पर रोहित कुमार, अमरजीत कुमार, विकास कुमार, नवीन कुमार, आदित्य राज सहित अन्य लोग मौजूद थे।
बेगूसराय में अबीर बनाती ग्रामीण महिलाएं।
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