मेटरनिटि लिव पर रहने वाली शिक्षिका को भी इंटर परीक्षा के मूल्यांकन कार्य में हिस्सा नहीं लेने पर निलंबित कर दिया गया है। मामला तब प्रकाश में आया जब एमपीपी कार्य में लगाए गए एमपीपी शिक्षकों के निलंबन की लिस्ट जारी की गई। अनुसूचित जाति मध्य विद्यालय में प्रतिनियुक्त शिक्षिका सूर्य बाला कुमारी पिछले दो दिसम्बर को ही मेटरनिटी लिव पर चली गई थी। तब इंटरमीडिएट की परीक्षा शुरू भी नहीं हुई थी। लेकिन जब मूल्यांकन की बात आई तो उनका नाम भी इस लिस्ट में शामिल था। इसी दौरान प्रधान सचिव के आदेश के बाद मूल्यांकन कार्य में योगदान नहीं करने वाले शिक्षकों और एमपीपी पर कार्रवाई शुरू की गई तो उक्त शिक्षिका को भी निलंबित कर दिया गया। हलांकि जिला शिक्षा पदाधिकारी का कहना है कि शिक्षकों का नाम बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वारा भेजा जाता है। ऐसे में अगर किसी का नाम गलती से मूल्यांकन या एमपीपी के लिए आ गया है तो इसकी जांच की जाएगी।
जिला परिषद के दो शिक्षक निलंबित, बी एसटीए के जिलाध्यक्ष ने कहा- यह गलत
मूल्यांकन कार्य में योगदान नहीं करने वाले जिले के दो नियमित शिक्षकों को भी निलंबित कर दिया गया है। इस संबंध में जिला परिषद कार्यालय से अलग-अलग दो पत्र निकाला गया है। जिसमें डीडीसी ने जीडीआर प्लस टू बड़ी बलिया के शिक्षक मो अफजल हुसैन और हाई स्कूल साहेबपुरकमाल के शिक्षक राम रतन प्रसाद यादव को निलंबित कर दिया है। इस संबंध में डीडीसी रिची पांडेय ने अपने पत्र में लिखा है कि डीईओ के द्वारा सूचित किया गया था कि उक्त शिक्षक इंटर के कॉपी मूल्यांकन में योगदान नहीं किए हैं। जिसके तहत बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के नियम के तहत यह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। निलंबन की अवधि में दोनों शिक्षकों का मुख्यालय जिला परिषद कार्यालय रखा गया है। इस कार्रवाई को लेकर जिला माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष उमानंद चौधरी ने बताया कि यह पूर्णतः गलत है। नियमतः नियमित शिक्षकों को निलंबित करने का अधिकार सिर्फ निर्देशक के पास है या फिर किसी विशेष परिस्थिति में आरडीडी अनुशंसा कर सकते है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2IguDh9
No comments:
Post a Comment